जमीन घोटाला: अवैध कब्जेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप में तीन पीसीएस अधिकारी निलंबित, मंडलायुक्त को जांच
ब्यूरो अशोक कुमार जायसवाल
चंदौली: जिले के पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर तहसील में सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में कथित अनियमितता और अवैध कब्जेदारों के पक्ष में आदेश पारित करने के आरोप में गुरुवार को तीन पीसीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। प्रमुख सचिव नियुक्ति एम. देवराज ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी किया है। निलंबित अधिकारियों में विराग पांडेय, लालता प्रसाद और सतीश कुमार शामिल हैं।जानकारी के अनुसार, ये तीनों अधिकारी वर्तमान में क्रमशः गाजियाबाद, बुलंदशहर और एटा जनपद में एसडीएम पद पर तैनात हैं, जबकि पूर्व में चंदौली में तहसीलदार/पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे थे। आरोप है कि इन्होंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर तहसील में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67(1) के तहत चल रही कार्रवाई में गंभीर लापरवाही बरती और बेदखली से संबंधित 20 आरसी नोटिस वापस लेते हुए अवैध कब्जेदारों के पक्ष में आदेश पारित किए।
जिलाधिकारी चंदौली द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि जिन जमीनों से नोटिस वापस लिए गए, वे खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, नवीन परती और बंजर जैसी सार्वजनिक व आरक्षित श्रेणी की बहुमूल्य भूमि थीं। इन पर अतिक्रमण करने वालों को राहत देने से सरकारी भूमि को भारी क्षति होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एडीएम (न्यायिक) चंदौली, एसडीएम चकिया और अतिरिक्त एसडीएम चंदौली की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार विराग पांडेय, तत्कालीन पीठासीन अधिकारी लालता प्रसाद और सतीश कुमार द्वारा दायित्वों का समुचित निर्वहन न करने और अनियमित आदेश पारित करने की पुष्टि हुई।
डीएम की रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव नियुक्ति ने तीनों अधिकारियों को निलंबित करते हुए वाराणसी मंडलायुक्त को मामले की विस्तृत जांच सौंपी है। निलंबन अवधि के दौरान तीनों अधिकारी राजस्व परिषद कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध
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