दहेज उत्पीड़न मामले में पति को 3 साल की सजा, कार की मांग पर पत्नी से करता था प्रताड़ना
ब्यूरो अशोक कुमार जायसवाल
चंदौली कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में 5 आरोपियों को किया दोषमुक्त
चंदौली जिले के चकिया स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट कुंवर जितेंद्र प्रताप सिंह की अदालत ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में सोमवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने दहेज की मांग को लेकर पत्नी को प्रताड़ित करने के दोष में पति को तीन वर्ष के कारावास और 14 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है तो उसे दस दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, इस मामले में साक्ष्य के अभाव में पांच अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
यह मामला 16 फरवरी 2019 को चकिया कोतवाली में दर्ज कराया गया था। चकिया कस्बे की निवासी वंदना विश्वास ने अपने पति सहित ससुराल पक्ष के छह लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि दहेज में लग्जरी कार की मांग पूरी न होने पर उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर सोनभद्र जनपद के अनपरा निवासी प्रोसेनजीत विश्वास (पति), असीम विश्वास, अनीता विश्वास, धोली मलकार, विष्णु मलकार और प्रहलाद को आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट कुंवर जितेंद्र प्रताप सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। चकिया थाने के पैरोकार दुर्गेश कुमार यादव तथा अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करते हुए कोर्ट ने पति प्रोसेनजीत विश्वास को दोषी करार दिया।वहीं, असीम विश्वास, अनीता विश्वास, प्रहलाद, धोनी मालकार उर्फ प्रति मालकार और विष्णु मालाकार (मृतक) को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
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