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1 अप्रैल 2026 को पूर्ण हुए मेरी पत्रकारिता के 40 वर्ष
साहित्यसेवा के हुए 47 साल
ब्यूरो रिपोर्ट तारा शुक्ला सोनभद्र
आज 1 अप्रैल को पत्रकारिता यात्रा के मेरे 40 वर्ष पूर्ण हुए। 1 अप्रैल सन 1986 को हिंदी दैनिक "स्वतंत्रत भारत" और अंग्रेजी दैनिक "The Pioneer" से सम्बद्ध हो कर पत्रकारिता की शुरुआत की थी।दोनों अखबार *"स्वतंत्र भारत"* (हिंदी) और *"द पायनियर"* (अंग्रेजी दैनिक) उस समय एक ही घराने से प्रकाशित थे। सन 1985 में मैंने औद्योगिक प्रवंधन प्रशिक्षण (मैनेजमेंट कोर्स) लखनऊ से किया था तत्पश्चात मीडिया से जुड़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ और इस समाचारपत्र से सम्बद्ध हुआ।
पत्रकारिता यात्रा के विभिन्न मोड़ इस कालावधि में हमने झेले लेकिन माँ वाग्देवी की सतत अनुकम्पा हमपर बनी रही। अनवरत पत्रकारिता में कर्मरत रहते हुए प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की यात्रा अविचल अविराम चलती रही।
सन 2002 - 03 में देश के जानेमाने चैनल स्टार न्यूज चैनल में कार्य करने का सुअवसर मिला जिसका नाम वर्तमान में बदल चुका है। सन 2004 में INDIA TV की लांचिंग के पूर्व ही इससे जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और इसके आरम्भ काल से अबतक अद्यतन समय तक कार्यरत हूँ। इसके लिए मैं आज भी कर्मनिष्ठा व आस्था से जुड़ा हुआ हूँ। INDIA TV चैनल के आरम्भ 2004 से 2007 तक मेरा कार्यक्षेत्र वृहत्तर रहा तथा उत्तरप्रदेश के नक्सल बेल्ट मीरजापुर , सोनभद्र व चंदौली की खबरें शूट करते फीड भेजने में सन्नध रहा। इसी बीच के समय मे बिहार (झारखंड ) के गढ़वा-पलामू एवं मध्यप्रदेश के सीधी जनपद ( जब सिंगरौली अलग नहीं हुआ था ) के लिए भी पूरी निष्ठा से कार्यरत रहा। 2007 से केवल सोनभद्र उत्तरप्रदेश की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा हूँ।सन 1986 से अधुनानन्त समय अर्थात आज 1 अप्रैल 2026 तक के सुमध्य प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों का दायित्व निर्वहन करते लेखनी एवं कार्यशैली सतत गतिमान है। इन40 वर्षों के बीच एक भी दिन न कलम थकी और न कैमरा रुका चाहे वह प्रिंट के लिये हो अथवा इलेक्ट्रॉनिक के लिए। मैं पल प्रतिपल कर्मठता सँग आजीवन सक्रिय रहा और जबतक जीवन है मैं समर्पित भाव से पत्रकारिता , साहित्य सेवा सँग ऐतिहासिक - पुरातात्विक व आध्यात्मिक क्षेत्रों के शोध - अन्वेषण में एकनिष्ठ भाव से सतत सन्नद्ध रहूंगा।
मेरे लेखनी की जीवन यात्रा पर आलोकपात करते आप समस्त विद्वतजनों का कृपाकांक्षी हूँ यह बताते हुए कि जब मैं हाईस्कूल में अध्ययनरत था और हिंदी साहित्य का इतिहास पढ़ाया जा रहा था तभी से मेरे अन्तस्तल से भाव उमड़ा रचनाधर्मिता - सर्जना के लिए तथा इतिहास के लिए। यह बात सन 1979 की है, जब भारतेंदु युग पर अध्यापन करते शिक्षक ने विस्तृत प्रकाश डाला। इससे अभिप्रेरित हो कर हमने उसी समय से कविता लेखन प्रारंभ किया और आज मैं इस मुकाम पर हूँ कि साहित्य सेवा करते 47 साल बीत गए।
पत्रकारिता के 40 वर्ष एवं साहित्य सेवा के सैंतालीस साल कब कैसे गुजर गया , समय का भान ही नहीं रहा। इसी सुमध्य ऐतिहासिक पुरातात्विक शोध एवं गवेषणापूर्ण आलेख हमारे आते रहे।
यह यात्रा अनवरत बनी रहे , सतत प्रयास कर्म जारी रहे और आजीवन पत्रारिता , साहित्य व इतिहास में मेरा मन रमा रहे , इस हेतु आप की प्रेरणा , शुभकामना एवं आशीष मिलता रहे, इसी अपेक्षा के साथ आपका कृपाकांक्षी ~ डॉ0 परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव “पुष्कर”
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