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Kashi Ki Aawaz | सकलडीहा पीजी कॉलेज में संगोष्ठी: खेलों में जेंडर समानता पर जोर, अवसर और चुनौतियों पर मंथन
चंदौली

सकलडीहा पीजी कॉलेज में संगोष्ठी: खेलों में जेंडर समानता पर जोर, अवसर और चुनौतियों पर मंथन

सकलडीहा पीजी कॉलेज में संगोष्ठी: खेलों में जेंडर समानता पर जोर, अवसर और चुनौतियों पर मंथन

ब्यूरो अशोक कुमार जायसवाल

सकलडीहा स्थित सकलडीहा पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग द्वारा “जेंडर समानता और खेलः अवसर, चुनौतियाँ और परिवर्तन की दिशा” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य खेलों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और इससे जुड़ी सामाजिक चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर रणधीर सिंह ने कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक समानता का भी प्रतिबिंब हैं। उन्होंने कहा कि जब तक लड़कियों को खेल के मैदान में बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक समाज में वास्तविक समानता अधूरी रहेगी। उन्होंने जोर दिया कि भारतीय बेटियाँ प्रतिभा और परिश्रम में किसी से कम नहीं हैं और अवसर मिलने पर वे इतिहास रच सकती हैं।
प्रोफेसर आनंद प्रकाश ने कहा कि लड़कियों की खेलों में भागीदारी बढ़ाना केवल खेल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण से जुड़ा प्रश्न है। सामाजिक बाधाएँ जितनी तेजी से टूटेंगी, भारत की खेल उपलब्धियाँ उतनी ही ऊँचाइयों तक पहुँचेंगी। वहीं प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव ने भारतीय समाज में खेलों में मौजूद जेंडर आधारित असमानताओं की ओर ध्यान दिलाते हुए सुझाव दिया कि महाविद्यालय यदि लड़कियों को समान संसाधन, प्रशिक्षक और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएँ, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि खेल शिक्षा का अभिन्न अंग है और शिक्षा का मूल भाव समानता है। उन्होंने महाविद्यालयों में सुरक्षित, समतामूलक और प्रोत्साहनपूर्ण वातावरण तैयार करने पर बल दिया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि जेंडर समानता केवल नीतियों से नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार यादव, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. अजय कुमार यादव, डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. यज्ञनाथ पांडेय सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे। संगोष्ठी का संचालन प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर दया निधि सिंह यादव ने दिया।

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