बनारस के बिजलीकर्मियो ने निजीकरण के विरुद्ध आज 384वें दिन भी जमकर विरोध प्रदर्शन किया
संघर्ष समिति ने कहा की बनारस के 111000 उपभोक्ताओं में से 59984 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के विद्युत संयोजन को उनके बिना सहमति के पोस्टपेड मोड को प्रीपेड मोड में कन्वर्ट कर दिया गया जो विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का खुला उल्लंघन है संघर्ष समिति ने कहा देश के कानून का खुला उल्लंघन बंद करें पावर कॉरपोरेशन
बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में उप्र में भी किसान संगठनों और केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों को मिलाकर वृहत मोर्चा बनाया जायेगा: निजीकरण वापस होने तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त होने तक चलता रहेगा आंदोलन
वाराणासी-16दिसम्बर2025। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन आज लगातार 384 वें दिन भी बनारस के बिजली कर्मियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया वक्ताओं ने बताया की पूरे बनारस में लगभग 111 000 स्मार्ट मीटर लगाए दिए गए हैं जिसमें 59984 मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड में बदल दिए गए हैं जो उपभोक्ताओं की सहमति नहीं थी उसके बावजूद विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5 ) का उल्लंघन करते हुए पावर कॉरपोरेशन द्वारा 59984 स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड मोड़ से प्रीपेड मोड में कन्वर्ट कर दिया गया। वक्ताओं ने यह भी बताया की विद्युत अधिनियम, 2003 की- धारा 55(1) के अनुसार स्मार्ट प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की लिखित सहमित से या नए कनेकशन के मामले में ही लगाया जा सकता है। कार्यशील पुराने मीटर को उपभोक्ता की सहमति के बगैर बदलना गैर-कानूनी है। स्मार्ट मीटर से इनकार करने पर धारा 56(1) के तहत बिजली काटना इसका दुरुपयोग है।
केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री माननीय श्रीपद नायक जी ने अभी हाल ही में संसद में या जानकारी साझा किया कि अभी भी विद्युत संयोजन की पोस्टपेड व्यवस्था डिफॉल्ट मोड में है और बिजली कंपनियों का AT&C लॉस 27.11% से घटकर 19.54 प्रतिशत हो गया है इस पर संघर्ष समिति के पदाधिकारी ने माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग किया है कि केंद्रीय विद्युत ऊर्जा मंत्री जी के संसद में दिए गए बयान का मान रखते हुए विद्युत उपभोक्ताओं को जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर युक्त कनेक्शन देने पर तत्काल रोक लगाते हुए बिजली कंपनियों की अच्छी सुधार को देखते हुए निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की कृपा करें।
संघर्ष समिति ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में एक वर्ष से अधिक समय से लगातार संघर्षरत बिजली कर्मचारियों की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के साथ बैठक होने के बाद संघर्ष के संयुक्त कार्यक्रम तय किए जाएंगे।वही संघर्ष समिति ने बताया कि निजीकरण करने हेतु बड़े पैमाने पर बिजली कर्मचारियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों एवं जबरदस्ती प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में कर्मचारियों के साथ किसानों और आम उपभोक्ताओं को जागरूक करने हेतु प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जायेगा। इस हेतु प्रदेश भर में बिजली पंचायतों, बिजली महा पंचायतों और रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि किसान संगठनों और केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ यह सहमति बनी है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता और आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक लगातार आंदोलन जारी रखा जाएगा।सभा को सर्वश्री अंकुर पाण्डेय, आनंद सिंह,राजेश सिंह,रंजीतपटेल,जयप्रकाश,धनपाल सिंह,राजेश पटेल,अजित पटेल, सरोज भूषण,प्रवीण सिंह,देवेंद्र सिंह,अरुण कुमार, रमेश कुमार, नागेंद्र कुमार आदि ने संबोधित किया।
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