स्टे तार में उतरे करंट से तीन झुलसे, एक की हालत गंभीर, वाराणसी रेफर।
ब्यूरो रिपोर्ट तारा शुक्ला सोनभद्र
सोनभद्र/ कोन थाना क्षेत्र के सलखन पावर हाउस अंतर्गत ग्राम सभा ससनई में रविवार को बिजली विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो गया, जहां घर के पास लगे बिजली के खंभे के स्टे तार में उतरे करंट की चपेट में आकर दो मासूम बच्चे व उन्हें बचाने दौड़ी उनकी मां झुलस गईं। तीनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से वाराणसी ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सभा ससनई निवासी रामप्रवेश के घर के पास बिजली का खंभा लगा है, जिसके स्टे तार में अचानक करंट उतर आया। रविवार को रामप्रवेश का पुत्र अभी (लगभग 2 वर्ष) व अर्चना (लगभग 3 वर्ष) खंभे के पास खेल रहे थे, तभी दोनों बच्चे स्टे तार के संपर्क में आ गए और करंट की चपेट में आकर झुलस गए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर उन्हें बचाने दौड़ी उनकी मां सुल्तानी (लगभग 30 वर्ष) भी करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजनों व ग्रामीणों की मदद से तीनों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए तीनों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने अर्चना की हालत चिंताजनक देखते हुए उसे वाराणसी ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि उसकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। घटना को लेकर गांव में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के स्टे तार में करंट उतरना बिजली विभाग की घोर लापरवाही है। लोगों का आरोप है कि कई बार खंभे व तार की मरम्मत की मांग की गई थी, लेकिन विभागीय कर्मचारियों ने ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण यह हादसा हो गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना की सूचना देने के काफी देर बाद तक बिजली विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में और नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों ने दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई व पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं पुलिस मामले की जानकारी होने की बात कह रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्टे तार की जांच व मरम्मत कर दी जाती तो यह बड़ा हादसा टल सकता था।
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